Thursday, 23 August 2012

नज़रों से तेरी जाम पिए जा रहा हूँ मैं

ग़ज़ल
नज़रों से तेरी जाम पिए जा रहा हूँ मैं 
और अल्विदाए होश किये जा रहा हूँ मैं 
बे खौफ जिन्दगी को जिए जा रहा हूँ मैं 
बस नाम तेरा नाम लिए जा रहा हूँ मैं

बरसा रहा है तीरे नज़र दिल पे वो मेरे 
और मुस्करा के दाद दिए जा रहा हूँ मैं 

सूई में तेरे ज़िक्र का धागा पिरो के बस 
अपनी जुबान-होंट सीए जा रहा हूँ मैं

कहतें हैं लोग इश्क है  इक जाम ज़हर का 
पर चाशनी समझ के पिए जा रहा हूँ मैं 

सूरत में मेरी यार की सूरत है जलवा गर 
अपनी बालाएं खुद ही लिए जा रहा हूँ मैं 

ये दर्दे इश्क दिल में सलामत रहे हबीब 
इस दर्द के सहारे जिए जा रहा हूँ मैं

گزل 

نظروں سے تیری جام پئے جا رہا ہوں میں 
اور آلودہ ہوش کئے جا رہا ہوں میں 

بے خوف زندگی کو جئےجا رہا ہوں میں 
بس نام تیرا نام لئے جا رہا ہوں میں 

برسا رہا ہے تیر نظر دل پہ وہ  میرے 
اور مسکرا کے داد دئے جا رہا ہوں میں

سوئی میں تیرے ذکر کا دھاگا پرو کے بس 
اپنی زبان ہونٹ سئے جا رہا ہوں میں

 کہتے ہیں لوگ عشق ہےاک جم زہر کا 
پر چاشنی سمجھ کے پئے جا رہا ہوں میں

صورت میں میری یار کی صورت ہے جلوہ گر 
اپنی بلاۓ خود ہی لئے جا رہا ہوں میں

یہ درد عشق دل میں سلامت رہے حبیب 
اس درد کے سہارے جئے جا رہا ہوں میں


Ghazal

Nazron se teri jaam piye ja raha hun mein 
Our alvida e hosh kiye ja raha hun mein 

Be khoof zindgi ko jiye ja raha hun mein 
Bas nam tera nam liye ja raha hun mein

Barsa raha hai teer e nazar dil pe wo mere
Our muskura ke dad diye ja raha hun mein

Sui mein tere zikr ka dhaga piro ke bas 
Apni zuban hont siye ja raha hun mein

Kehte hain loog ishq hai ek jaam zehr ka 
Par chashni samajh se piye ja raha hun mein

Surat mein meri yaar ki surat hai jalwa gar 
Apni balaa e khud hi liye ja raha hun mein 

Ye dard e ishq dil mein salamat rahe habib
Is dard ke sahare jiye ja raha hun mein 

by habib kavishi 

4 comments:

  1. Waaaaaah.... Behad khubsurat Gazal Habib bhai...

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    1. शुक्रिया शाहनवाज़ भाई

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  2. बहुत खूब , بہت خوب , very nice

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    1. शुक्रिया पलाश जी

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